बीबीसी से बातचीत में दिल्ली एम्स के ठेका कर्मचारी यूनियन के जनरल सेक्रेटरी मृगांक कहते हैं, 'दिल्ली एम्स में 600 सैनिटेशन कर्मचारी हैं। इसमें से अधिकतर सेनिटेशन स्टाफ कॉन्ट्रैक्ट पर काम करते हैं। अस्पताल इन्हें अपना कर्मचारी नहीं मानते। वेस्ट मैनेजमेंट के काम में लगे सेनिटेशन कर्मचारियों को मास्क और सैनेटाइज़ेशन के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ता है। वेस्ट डिस्पोज़ल करने वाले सैनिटेशन स्टाफ़ को भी प्रोटेक्टिव गियर चाहिए होते हैं, ताकि वो उस वेस्ट के संपर्क में ना आ जाएं। लेकिन ये शुरू में मिल नहीं रहे थे। हमने अस्पताल प्रशासन को चिट्ठियां लिखीं। अब कुछ जगह मिलना शुरू हुए हैं। लेकिन अभी भी परेशानी बनी हुई है।'