SAVE WEST BENGAL FROM TRINAMOOL CONGRESS

RESIST FASCIST TERROR IN WB BY TMC-MAOIST-POLICE-MEDIA NEXUS

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Monday, February 17, 2020

तो भागवत नहीं चाहते कि महिलाएं पढ़ें, शिक्षित समाज का हिस्सा बनें, अपने लिए फ़ैसले करें और आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर बनें। आरएसएस प्रमुख को ये समझना चाहिए कि तलाक पारिवारिक मुश्किल नहीं, बल्कि पारिवारिक मुश्किलों का हल है। तलाक के मामले बढ़ने का मतलब है कि ‘अबला औरत तेरी यही कहानी, आंचल में दूध, आंखों में पानी’ वाली स्थिति बदल रही है। वो सबला बन रही है और वह सबला औरत को देख कर डरते हैं। दुर्गा और काली को पूजने वाला समाज अपने परिवार की बेटी और बहू को दुर्गा-काली के रूप में नहीं देखना चाहता।

देखिए मोदी जी, सुनिए भागवत जी : हम औरतें; सेना से लेकर शाहीन बाग़ तक | न्यूज़क्लिक