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RESIST FASCIST TERROR IN WB BY TMC-MAOIST-POLICE-MEDIA NEXUS

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Sunday, March 8, 2020

भारतीय रिजर्व बैंक की फरवरी माह की मासिक रिपोर्ट बताती है कि कमर्शियल बैंक के सकल ऋण की वृद्धि दर में फिर से बड़ी गिरावट आई है। रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2013 में बैंक ऋण की वृद्धि दर 15.2 प्रतिशत थी जो जनवरी 2020 में घटकर 8.5 प्रतिशत पर आ गयी है। पिछले साल यानी जनवरी 2019 में यह 13.1 प्रतिशत थी। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि कर्ज की वृद्धि दर में आई इस गिरावट का सीधा असर रोजगार और आर्थिक वृद्धि पर पड़ेगा। गौरतलब है कि बैंकों द्वारा दिया जाने वाला ऋण देश में रोजगार और आर्थिक वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के छोटे बड़े व्यापारी और उद्योगपतियों को बैंक ऋण की मदद से ही व्यवसाय को बढ़ाने का मौका मिलता हैं जिसके फलस्वरूप रोजगार और उत्पादन में वृद्धि होती है। आकड़ों से पता चलता है कि जबसे मोदी सरकार आई है तबसे व्यापारी और उद्योगपतियों के ऋण लेने की क्षमता में कमी आयी है। जानकारों का मानना है कि सरकार की गलत नीतियों के चलते व्यापारी और उद्योगपतियों को नुकसान का सामना करना पड़ा है। इसके कारण देश की आर्थिक वृद्धि के साथ साथ व्यापारी और उद्योगपतियों का मनोबल भी गिरा है। उद्योगपतियों को निवेश के बाद भी मुनाफा नहीं मिल रहा हैं जिसके कारण सकल बैंक ऋण (Gross Bank Credit) की वृद्धि दर में गिरावट आयी है। जनवरी 2013 में बैंक ऋण की वृद्धि दर 15.2 प्रतिशत थी जो जनवरी 2020 में घटकर 8.5 प्रतिशत पर आ गयी हैं जैसा की नीचे दिखाया गया है। सभी क्षेत्रों में बैंक ऋण की स्थिति - अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाले मुख्यतः तीन क्षेत्र कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र हैं। साथ ही पर्सनल ऋण के माध्यम से लिया गया ऋण भी इन तीनों क्षेत्रों से ही जुड़ा होता है। पिछले कुछ समय से इन क्षेत्रों में ऋण की वृद्धि दर में बहुत बड़ी गिरावट आयी है। कृषि क्षेत्र में यह घट कर 6.5 प्रतिशत रह गयी है। उद्योग में घट कर 2.5 प्रतिशत रह गयी है। सेवाओं के क्षेत्र में घट कर 8.9 प्रतिशत रह गयी है। व्यक्तिगत ऋण में यह दर समान बनी हुई है जैसा की नीचे दिखाया गया है।

बदहाल अर्थव्यवस्था: सकल बैंक ऋण की वृद्धि दर में भी भारी गिरावट | न्यूज़क्लिक