SAVE WEST BENGAL FROM TRINAMOOL CONGRESS

RESIST FASCIST TERROR IN WB BY TMC-MAOIST-POLICE-MEDIA NEXUS

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Thursday, March 5, 2020

झूठा नैरेटिव *************************** एक ही जैसी जन मीडिया द्वारा सावधानीपूर्वक गढ़ा गया और सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा मैनेज किए गए नैरेटिव को तैयार किया गया और इसे आगे बढ़ाया गया है। ख़बर थी कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 24 फरवरी की रात को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दिल्ली छोड़ने के बाद कई बैठकें कीं। ट्रंप के पास हिंसा में पीड़ित लोगों के लिए सांत्वना का एक शब्द नहीं था जिसमें क़रीब क़रीब 47 लोगों की जानें चली गईं जो 1984 के हत्याकांड की याद दिलाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने "शांति और सौहार्द" के लिए ट्वीटर पर एक अपील की थी। ध्यान दें कि हिंसा के बाद चौथे दिन यानी 26 फरवरी को यह किया गया। शाह ने अपनी ओर से हिंसा के बारे में बहुत देर के बाद कहा जो वास्तव में 28 फरवरी का मामला है और वह भी ओडिशा में एक रैली को संबोधित करते हुए। उन्होंने यह कहकर पूरी नैरेटिव को बताया कि विपक्षी दल गलत सूचना फैलाकर नए नागरिकता कानून (सीएए) पर सांप्रदायिक हिंसा भड़का रही हैं। यह सच्चाई से बहुत दूर है जिसे हर कोई जानता है। दिल्ली में हिंसा की शुरुआत कांग्रेस या आम आदमी पार्टी (आप) ने नहीं की थी। और किसी भी मामले में, सीएए केवल अनुमानित कारण था। यह बहुत जल्द ही मुस्लिम लोगों और उनके क्षेत्र में संपत्ति पर एक पूर्ण पैमाने पर हमले में तब्दील हो गया जिसके चलते जवाबी हिंसा भी हुई। लेकिन, शाह ने जो कहा हम उस पर एक नज़र डालते हैं। उसी रैली में उन्होंने यह भी कहा कि सीएए तीन पड़ोसी देशों में सताए गए धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के लिए है न कि "किसी की नागरिकता छीनने" के लिए। दिसंबर में कानून के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन शुरू होने और तब से जारी रहने के बाद चालाकी दिखाना नया नहीं है यही भाजपा की मानक प्रतिक्रिया है। नया कानून मुसलमानों को नागरिकता से वंचित कर देगा क्योंकि दी गई छूट में उन्हें शामिल नहीं किया गया है। उन्हें कठिन से कठिन मार्ग पर चलना होगा।

दिल्ली हिंसा : ’न्यू इंडिया’ के लिए बीजेपी की डरावनी परिकल्पना | न्यूज़क्लिक