SAVE WEST BENGAL FROM TRINAMOOL CONGRESS

RESIST FASCIST TERROR IN WB BY TMC-MAOIST-POLICE-MEDIA NEXUS

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Thursday, March 5, 2020

बीजेपी/आरएसएस का ज़ोर– माहौल में तनाव क़ायम रखना हालांकि, यह केवल एक चीज़ नहीं है। इन भाजपा/ आरएसएस के कई विचारों की तरह विधायी या प्रशासनिक कार्रवाई धार्मिक आधारों पर विभाजन करने का एक तरीका है। अनुच्छेद 370 को निरस्त करना और कश्मीर को एक आश्रित केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देना इसमें शामिल था। इसे इस्लामिक आतंकवादियों और दुश्मनों के ख़िलाफ़ एक कार्रवाई के रूप में देश के बाकी हिस्सों में भुनाया गया था, जिससे देश के बाकी हिस्सों के साथ इस राज्य को "एकीकृत" किया गया था। याद रखें, इस समय तक जम्मू-कश्मीर भारत का एकमात्र मुस्लिम बहुमत वाला राज्य था। सीएए और प्रस्तावित जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) जिसके लिए प्रक्रिया शुरू की जानी है इसी तरह के यंत्र हैं। भारत में काफी ज़्यादा अवैध आप्रवासी या घुसपैठिए नहीं हैं। लेकिन असामाजिक तत्वों की धार्मिक आधार पर लोगों के बीच एक देशव्यापी विभाजन करने की एक कोशिश है। नागरिकता की जांच के नाम पर और इसके प्रतिरोध को देखते हुए ऐसे विभाजन बुरे और गहरे हो जाएंगे जो देशद्रोही, विदेशी, दुश्मन आदि कहे जाने वाले लोगों पर किए जा रहे सोशल मीडिया अभियानों की भरमार से पोषित होंगे। दिल्ली में जो हुआ उसकी छोटी सी झलक। मुसलमानों (देशद्रोही के रूप में परिभाषित किया गया था क्योंकि वे सीएए / एनपीआर / एनआरसी का विरोध कर रहे थे) के ख़िलाफ़ हिंसा के लिए एक भड़काऊ, ज़हरीला सार्वजनिक चुनाव प्रचार था। यह व्यक्तिगत रूप से खुद अमित शाह द्वारा मैनेज किया गया था। फिर, कुछ हफ्तों के भीतर हिंसा भड़क उठी।

दिल्ली हिंसा : ’न्यू इंडिया’ के लिए बीजेपी की डरावनी परिकल्पना | न्यूज़क्लिक