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RESIST FASCIST TERROR IN WB BY TMC-MAOIST-POLICE-MEDIA NEXUS

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Sunday, March 8, 2020

वैसे डर का कारोबार इतना पुराना भी नहीं है, पुराने राजाओं के काल से चला आ रहा है और आज के राजाओं के समय भी जारी है। पुराने ज़माने से ही राजा अपनी प्रजा पर डर, भय, आतंक का कारोबार आज़माते रहे हैं। तब वे अपनी प्रजा को दूसरे राजा से डराते थे। राजा को डर अपने राज के जाने का होता था पर डराते जनता को थे। अपनी प्रजा को डराते थे कि दूसरा राजा जीत गया तो तुम्हारे ऊपर अत्याचार ढहाया जायेगा, तुम्हारा धर्म और जाति भ्रष्ट कर दी जायेगी, तुम्हारा जीवन नरक बन जायेगा। आज भी कमोबेश वही जारी है। समय के साथ साथ सभी कारोबारों को करने के तरीके बदल चुके हैं। लगभग सभी कामकाज दो तरह से होने लगे हैं, ऑन लाइन और ऑफ लाइन। आजकल सारे काम काजों में इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है। आपको राशन मंगवाना हो तो ऑन लाइन भी उपलब्ध है, दवाइयां, कपड़ें और अन्य सारी चीजें भी ऑफ लाइन के अलावा ऑन लाइन भी उपलब्ध हैं।

तिरछी नज़र : डर और नफ़रत का कारोबार | न्यूज़क्लिक